The Definitive Guide to lyrics shiv chalisa

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।

मोहिः संभ्रान्तः स्थित्वा शान्तिं न प्राप्नोत्।

मैना मातु की ह्वै दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

थोड़ा जल स्वयं पी लें और मिश्री प्रसाद के रूप में बांट दें।

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भे